‘जनहित के नाम पर नुकसान नहीं’: आबकारी विभाग ने ‘प्रायोजित विरोध’ की राजनीति पर कसा शिकंजा, ₹200 करोड़ के राजस्व घाटे पर सख्त चेतावनी
देहरादून, उत्तराखंड – उत्तराखंड में वैध शराब कारोबार के विरोध के नाम पर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वालों पर अब आबकारी विभाग ने शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने इस संबंध में एक साफ और कड़ा संदेश जारी किया है, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी है कि “जनभावनाओं की आड़ लेकर असामाजिक तत्व और शराब तस्कर अपने निजी हित साध रहे हैं, जिन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में शराब की दुकानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का दौर चल रहा है, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हो रहा है।
आयुक्त ने इन विरोध प्रदर्शनों को ‘प्रायोजित आंदोलन’ करार दिया है और स्पष्ट किया है कि जनहित के नाम पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग अब ऐसे तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी में है।
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ढालवाला विवाद: ‘प्रायोजित विरोध’ का आरोप
आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने अपने बयान में ऋषिकेश क्षेत्र के ढालवाला में हाल ही में हुई हत्या की आड़ में शराब की दुकान के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इस आंदोलन को “प्रायोजित आंदोलन” करार दिया है।
- अपराध से ध्यान भटकाना: आयुक्त ने आरोप लगाया कि ढालवाला में हुए अपराध (हत्या) की जांच से ध्यान भटकाने और भ्रामक प्रचार करने के लिए जानबूझकर वैध शराब की दुकान को निशाना बनाया जा रहा है। उनका तर्क है कि अपराध और वैध शराब दुकान का संचालन दो अलग-अलग मुद्दे हैं, और एक की आड़ में दूसरे को बदनाम करना या बाधित करना अनुचित है।
- निजी हितों की पूर्ति: आयुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि कुछ असामाजिक तत्व और शराब तस्कर जनभावनाओं की आड़ लेकर अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति कर रहे हैं। इन तत्वों का उद्देश्य वैध शराब कारोबार को बाधित कर अवैध शराब की बिक्री को बढ़ावा देना हो सकता है, जिससे उन्हें आर्थिक लाभ मिल सके।
यह आरोप राज्य में शराब के विरोध से जुड़े आंदोलनों की प्रकृति पर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जहां विभाग इसे केवल सामाजिक विरोध नहीं, बल्कि आपराधिक और आर्थिक एजेंडा भी मान रहा है।
₹200 करोड़ का भारी नुकसान: 9 जिलों में 41 दुकानें प्रभावित
आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने उन चौंकाने वाले आंकड़ों का खुलासा किया है, जो इस तरह के संगठित विरोध प्रदर्शनों के कारण राज्य सरकार को हुए भारी राजस्व नुकसान को दर्शाते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के विरोधों के चलते उत्तराखंड के 9 जिलों में कुल 41 दुकानों का संचालन बाधित हुआ है।
- राजस्व का घाटा: इन बाधाओं के कारण राज्य सरकार को अब तक करीब ₹200 करोड़ का आबकारी राजस्व और लगभग ₹8 करोड़ का वैट (मूल्य वर्धित कर) का नुकसान हुआ है। यह आंकड़ा राज्य की अर्थव्यवस्था और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि आबकारी राजस्व राज्य के महत्वपूर्ण आय स्रोतों में से एक है।
- जिलावार नुकसान (आंकड़े):
- बागेश्वर: ₹23 करोड़
- अल्मोड़ा: ₹18 करोड़ करोड़
- पौड़ी: ₹15 करोड़
- नैनीताल: ₹12.5 करोड़
- अल्मोड़ा (अन्य क्षेत्र): ₹11 करोड़
- उत्तरकाशी: ₹6.4 करोड़
- देहरादून: ₹3.5 करोड़
- हरिद्वार: ₹1.2 करोड़
- ढालवाला का दैनिक नुकसान: विशेष रूप से ढालवाला क्षेत्र में चल रहे विरोध के कारण प्रतिदिन ₹16 लाख का राजस्व नुकसान हो रहा है, जो उस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण राशि है।
आयुक्त ने इस नुकसान को ‘राज्य की आर्थिक रीढ़’ पर हमला बताया और जोर देकर कहा कि ऐसे तत्वों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शराब तस्करी पर नकेल, वैध कारोबार को संरक्षण
राजस्व के नुकसान के बावजूद, आबकारी विभाग अवैध शराब के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है। विभाग का मानना है कि प्रभावी प्रवर्तन कार्रवाई से वैध शराब की बिक्री में वृद्धि हुई है, जिससे राजस्व का कुछ हिस्सा पुनः प्राप्त हो रहा है।
- अवैध शराब पर कार्रवाई: विभाग ने अब तक 2,505 मुकदमे दर्ज किए हैं और 45,685 लीटर अवैध शराब बरामद की है। यह दर्शाता है कि विभाग अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सक्रिय है।
- वैध बिक्री में वृद्धि: आयुक्त ने बताया कि प्रवर्तन कार्रवाई के चलते वैध बिक्री में वृद्धि हुई है। पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में 2.5 लाख पेटी अधिक शराब बेची गई है। यह इस बात का प्रमाण है कि जब अवैध शराब बाजार से हटती है, तो उपभोक्ता वैध दुकानों की ओर मुड़ते हैं।
- भविष्य का लक्ष्य: अगले छह महीनों में विभाग ने 11 लाख पेटी अतिरिक्त बिक्री का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो राजस्व वृद्धि की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
राजस्व लक्ष्य और ‘विरोध की राजनीति’ पर रोक की आवश्यकता
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आबकारी विभाग को ₹5,060 करोड़ का कुल राजस्व लक्ष्य मिला था। इसमें से अब तक ₹2,409 करोड़ (95.59%) वसूले जा चुके हैं, जो विभाग की प्रभावी कार्यप्रणाली को दर्शाता है। यह आंकड़ा तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब ₹200 करोड़ के नुकसान को ध्यान में रखा जाए।
- आर्थिक रीढ़: आबकारी राजस्व राज्य की आर्थिक रीढ़ में से एक है, जिसका उपयोग विकास परियोजनाओं, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक खर्चों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
- कड़ी चेतावनी: आयुक्त अनुराधा पाल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है, “वैध कारोबार में बाधा डालने वाली किसी भी प्रवृत्ति को सख्ती से कुचला जाएगा। जनहित के नाम पर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगा।”
यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार और आबकारी विभाग अब ऐसे विरोध प्रदर्शनों को केवल सामाजिक विरोध के रूप में नहीं देखेंगे, बल्कि उन्हें सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाली एक सुनियोजित गतिविधि मानेंगे और उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करेंगे। विभाग का यह रुख उत्तराखंड में शराब के वैध कारोबार और उसके विरोध से जुड़े भविष्य के आंदोलनों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
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