नंदा देवी की चोटियों पर अभी बर्फ की सफेद चादर बिछी है, लेकिन देवभूमि के आंगन में बसंत के आगमन के साथ ही एक नई ऊर्जा का संचार हो गया है। शंख की ध्वनि और मंत्रों के उद्घोष के बीच, करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि तय हो गई है।
शनिवार को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर टिहरी रियासत के राजदरबार में पंचांग गणना के बाद यह घोषणा की गई कि भगवान बदरी विशाल के द्वार 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
परंपरा और विधि-विधान: बसंत पंचमी का महत्व
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का कैलेंडर हर साल बसंत पंचमी के दिन ही आकार लेना शुरू करता है। परंपरा के अनुसार, टिहरी के महाराजा (जिन्हें ‘बोलंदा बदरी’ कहा जाता है) की उपस्थिति में राजपुरोहितों द्वारा गणना की जाती है।
- गाडू घड़ा परंपरा: कपाट खुलने से पहले भगवान के अभिषेक के लिए प्रयुक्त होने वाले तिलों के तेल की ‘गाडू घड़ा’ यात्रा की तिथि भी घोषित की गई है।
- अक्षय तृतीया का योग: वैसे तो कपाट अक्सर अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं, लेकिन पंचांग की गणना और ग्रहों की स्थिति के आधार पर इस बार 23 अप्रैल का दिन सर्वोत्तम माना गया है।
2025 बनाम 2026: इस बार जल्दी दर्शन
पिछले साल (2025) की तुलना में इस बार श्रद्धालु भगवान के दर्शन जल्दी कर सकेंगे।
- 2025 में: कपाट 4 मई को खुले थे।
- 2026 में: कपाट 23 अप्रैल को खुल रहे हैं।
यह 11 दिन का अंतर यात्रा सीजन को थोड़ा लंबा करेगा, जिससे पर्यटन व्यवसायियों और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को अधिक समय मिलेगा। हालांकि, अप्रैल के अंत में भी बदरीनाथ में कड़ाके की ठंड और बर्फबारी की संभावना बनी रहती है, इसलिए यात्रियों को गर्म कपड़ों और स्वास्थ्य जांच के साथ आने की सलाह दी जाती है।
बदरीनाथ धाम: क्यों है यह मोक्ष का द्वार?
सातवीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा पुनर्जीवित यह धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था का जीवंत स्वरूप है।
- शालिग्राम मूर्ति: मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की 3.3 फीट ऊँची शालिग्राम शिला से बनी स्वयंभू मूर्ति है।
- नारद कुंड का इतिहास: मान्यता है कि शंकराचार्य जी ने अलकनंदा नदी के नारद कुंड से इस मूर्ति को निकालकर मंदिर में स्थापित किया था।
- तप्त कुंड का रहस्य: मंदिर के ठीक नीचे स्थित यह प्राकृतिक गर्म पानी का कुंड है, जहां बर्फीली ठंड के बीच भी पानी का तापमान लगभग 45°C रहता है।
यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना और तैयारी
चारधाम यात्रा 2026 के लिए उत्तराखंड सरकार और बीकेटीसी (Badrinath-Kedarnath Temple Committee) ने अभी से कमर कस ली है।
- पंजीकरण (Registration): कपाट खुलने की तिथि घोषित होते ही अब आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
- सड़क मार्ग: ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना और ऑल-वेदर रोड के कारण यात्रा अब पहले से अधिक सुगम हो गई है।
- दर्शन का समय: सुबह 6:15 बजे कपाट खुलने के बाद, नियमित पूजा-अर्चना और अभिषेक का क्रम शुरू होगा।
निष्कर्ष: आस्था का नया अध्याय
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की घोषणा के साथ ही उत्तराखंड के पहाड़ों में रौनक लौटने वाली है। यह यात्रा केवल दर्शन की नहीं, बल्कि स्वयं को प्रकृति और परमात्मा के करीब लाने का एक अवसर है। अगर आप भी इस साल बदरी विशाल के चरणों में शीश नवाना चाहते हैं, तो अपनी तैयारी अभी से शुरू कर दें।

